इतिहासगीतोपनिषद्
भगवद्गीता
भगवद्गीता
Vyasa5th–2nd Century BCEगीतोपनिषद्
कुरुक्षेत्र के रणांगण में कृष्ण और अर्जुन के बीच हुए 18 अध्यायों के संवाद में धर्म, कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग का अद्भुत समन्वय किया गया है। निष्काम कर्म और मोक्ष के मार्ग को इस ग्रंथ में सरल और व्यावहारिक रूप से समझाया गया है। भारतीय दार्शनिक परंपरा में यह सर्वकालीन मार्गदर्शक ग्रंथ के रूप में प्रतिष्ठित है।
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सुभाषितम्
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