रामायणम्
Ramayana
The Adikavya (first poem) narrating the life of Rama — ideal king, son, and husband. Across seven kandas, it establishes ideals of maryada, filial piety, conjugal fidelity, and devoted friendship through Rama's war against Ravana.
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Subhashitams
Subhashitams from this grantha
उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम् । सोत्साहस्य हि लोकेषु न किञ्चिदपि दुर्लभम् ॥
हे आर्य! उत्साह ही सच्चा बल है। उत्साह से बड़ा कोई बल नहीं। उत्साही व्यक्ति के लिए इस संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं।
अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे रोचते लक्ष्मण । जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥
हे लक्ष्मण! यह स्वर्णमयी लंका मुझे नहीं भाती। जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।
मरणान्तानि वैराणि निवृत्तं नः प्रयोजनम् । क्रियतामस्य संस्कारो ममाप्येष यथा तव ॥
मरण के साथ वैर समाप्त होता है, हमारा प्रयोजन पूर्ण हुआ। इसका संस्कार करो — यह मेरा भी उतना ही है जितना तुम्हारा।
शोको नाशयते धैर्यं शोको नाशयते श्रुतम् । शोको नाशयते सर्वं नास्ति शोकसमो रिपुः ॥
शोक धैर्य को नष्ट करता है। शोक अर्जित ज्ञान को नष्ट करता है। शोक सब कुछ नष्ट कर देता है। शोक के समान कोई शत्रु नहीं है।
सुलभाः पुरुषाः राजन् सततं प्रियवादिनः । अप्रियस्य च पथ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभः ॥
हे राजन्! प्रियवादी पुरुष सुलभ हैं। अप्रिय पर पथ्य (हितकर) बात कहने वाला और सुनने वाला दोनों दुर्लभ हैं।