ऋग्वेदः
Rigveda
The oldest of the four Vedas, comprising 1,028 hymns across ten mandalas addressed to Agni, Indra, Varuna, and cosmic forces. Establishes the foundation of Hindu universalism: 'Ekam sat vipra bahudha vadanti' — Truth is one, the wise call it by many names.
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Subhashitams
Subhashitams from this grantha
सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम् । देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते ॥
साथ-साथ चलो, साथ-साथ बोलो, तुम्हारे मन एक हों — जैसे प्राचीन काल में देवता एक-दूसरे के मन को जानकर मिलकर कर्तव्य निभाते थे।
समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः । समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति ॥
तुम्हारे संकल्प एक हों, तुम्हारे हृदय एक हों, तुम्हारे मन एक ही प्रकार से सोचें — जिससे तुम्हारी सामूहिक शक्ति बढ़े।
समानी वः आकूतिः समाना हृदयानि वः । समानमस्तु वो मनः यथा वः सुसहासति ॥
तुम्हारी आकूति (संकल्प) समान हो, हृदय समान हों, मन समान हो — जिससे तुम्हारी संगठन-शक्ति प्रभावशाली बने।
संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् । देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते ॥
संगच्छध्वम् (साथ चलो), संवदध्वम् (मिलकर बोलो), मनों को जानो। जैसे पूर्वकाल में देवताओं ने जानकर कार्य किया।
एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति । अग्निं यमं मातरिश्वानमाहुः ॥
सत्य एक है; विद्वान् लोग उसे अनेक रूपों में कहते हैं — अग्नि, यम, और मातरिश्वा (वायु)। (ऋग्वेद)