SubhashitaSubhashita Sangraha
सुभाषितरत्नाकरः
Subhashita Ratnakar
Various compilers (anthology)12th–16th Century CESubhashita Sangraha
A Sanskrit anthology — 'Mine of Well-spoken Gems' — collecting aphorisms on virtue, wisdom, effort, and human character. Compiles verses celebrating the learned, the generous, and the heroic while critiquing the idle and ignorant from diverse classical sources.
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Subhashitams
Subhashitams from this grantha
उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः । षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र देवः सहायकृत् ॥
उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम — ये छह जहाँ होते हैं, वहाँ स्वयं भगवान भी सहायता करते हैं।
effort · divine_graceView
अमंत्रमक्षरं नास्ति नास्ति मूलमनौषधम् । अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः ॥
कोई अक्षर ऐसा नहीं जो मंत्र न हो, कोई जड़ी-बूटी ऐसी नहीं जो औषधि न हो। कोई मनुष्य अयोग्य नहीं — दुर्लभ है तो केवल उसे जोड़ने वाला, उसकी क्षमता पहचाननेवाला।
potential · wisdomView
नरस्याभरणं रूपं रूपस्याभरणं गुणाः । गुणस्याभरणं ज्ञानं ज्ञानस्याभरणं क्षमा ॥
मनुष्य का आभूषण रूप है, रूप का आभूषण गुण है। गुण का आभूषण ज्ञान है, और ज्ञान का आभूषण क्षमा है।
virtue · wisdomView