सप्तर्षिब्रह्मांडीय ज्ञान के संरक्षक
सप्त ऋषि प्राचीन भारत के सात ऋषि हैं जिनकी वेदों और अन्य हिंदू साहित्य में कई स्थानों पर प्रशंसा की गई है। उन्हें वैदिक धर्म के कुलपति के रूप में माना जाता है।
इमावेव गोतमभरद्वाजौ । अयमेव गोतमः अयं भरद्वाजः । इमावेव विश्वामित्रजमदग्नी । अयमेव विश्वामित्रः अयं जमदग्निः । इमावेव वसिष्ठकश्यपौ । अयमेव वसिष्ठः अयं कश्यपः । वागेवात्रिः वाचाह्यन्नमद्यते अत्तिर्ह वै नामैतद्यदत्रिरिति । सर्वस्यात्ता भवति सर्वमस्यान्नं भवति य एवं वेद ॥ ४ ॥
imāveva gotamabharadvājau | ayameva gotamaḥ ayaṃ bharadvājaḥ | imāveva viśvāmitrajamadagnī | ayameva viśvāmitraḥ ayaṃ jamadagniḥ | imāveva vasiṣṭhakaśyapau | ayameva vasiṣṭhaḥ ayaṃ kaśyapaḥ | vāgevātriḥ, vācā hyannam adyate attir ha vai nāmaitad yad atrir iti | sarvasyāttā bhavati sarvam asyānnaṃ bhavati ya evaṃ veda || 4 ||
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ज्ञान का वंश
सप्त ऋषि प्राचीन भारत के सात ऋषि हैं जिनकी वेदों और अन्य हिंदू साहित्य में कई स्थानों पर प्रशंसा की गई है। उन्हें वैदिक धर्म के कुलपति के रूप में माना जाता है।
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सप्त ऋषि ज्ञान प्रश्नोत्तरी
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