गणेश का जन्म एवं गणाधिपत्य
प्राचीन काल में देवी पार्वती ने हल्दी के लेप से एक बालक का रूप बनाकर उसमें प्राण डाले। स्नान हेतु जाते समय उन्होंने उसे द्वारपाल नियुक्त किया। उसी समय भगवान शिव वहाँ आए, किंतु बालक ने उन्हें पहचान न पाकर रोक दिया। क्रोधित शिव ने बालक का सिर काट डाला। पार्वती के शोक को देखकर शिव ने एक हाथी का सिर मंगवाकर बालक के धड़ पर लगाया और उसे पुनर्जीवित किया। जब सभी देवताओं ने इस बालक को गणों का अधिपति बनाने का अनुरोध किया, तो शिव ने घोषणा की कि उनके दोनों पुत्रों — गणेश और कुमारस्वामी — में से जो पहले तीनों लोकों की परिक्रमा पूर्ण करेगा, उसे यह पद मिलेगा। कुमारस्वामी तुरंत अपने मयूर वाहन पर सवार होकर चल पड़े, परंतु गणेश ने केवल अपने माता-पिता पार्वती और शिव की परिक्रमा की, यह कहते हुए कि वे ही समस्त लोकों को समाहित किए हुए हैं। उनकी इस बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर माता-पिता ने उन्हें गणाधिपत्य प्रदान किया।