स्तोत्रस्तोत्र / भक्तिकाव्य
भज गोविन्दम्
भज गोविन्दम्
Adi Shankaracharya8th Century CEस्तोत्र / भक्तिकाव्य
मृत्युशय्या के समीप भी व्याकरण के नियम रटते एक वृद्ध को देखकर स्फुरित हुए इकत्तीस श्लोकों की रचना। साधकों को व्याकरण और धन की आसक्ति त्यागकर गोविंद की भक्ति में लीन होने का आग्रह करते हुए यह सांसारिक मोह पर तीक्ष्ण प्रहार करती है और साथ में कोमल भक्ति का भाव भी जगाती है।
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