श्रुतिउपनिषद् / श्रुति
बृहदारण्यकोपनिषद्
बृहदारण्यक उपनिषद्
Yajnavalkya / Vedic Seersc. 900–600 BCEउपनिषद् / श्रुति
सभी प्रमुख उपनिषदों में सबसे बड़ा यह ग्रंथ याज्ञवल्क्य के आत्मा-ब्रह्म की एकता पर संवादों, 'नेति नेति' पद्धति और 'असतो मा' शांतिपाठ को समाहित करता है। अद्वैत वेदांत के दार्शनिक आधार के रूप में यह श्रुतिग्रंथ अनन्य महत्त्व रखता है। इसमें मैत्रेयी और गार्गी जैसी विदुषी स्त्रियों के ब्रह्मज्ञान की चर्चाएँ भी हैं।
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सुभाषितम्
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