श्रुतिमंत्रोपनिषद्
ईशोपनिषद्
ईशोपनिषद्
Vedic Seers (Shruti)c. 800–600 BCEमंत्रोपनिषद्
अठारह मंत्रों में समेटा गया सबसे संक्षिप्त प्रमुख उपनिषद्, जो 'ईशावास्यमिदं सर्वम्' की उद्घोषणा से आरंभ होता है। कर्म और ज्ञान के बीच सुंदर समन्वय स्थापित करते हुए यह सिखाता है कि वैराग्य का अर्थ संसार का त्याग नहीं, बल्कि ममता का त्याग है। संन्यास और गृहस्थी दोनों के लिए समान रूप से प्रासंगिक यह उपनिषद् अद्वितीय है।
0
सुभाषितम्
इस ग्रन्थ के सुभाषितम्
अभी तक कोई सुभाषितम् सूचीबद्ध नहीं।