श्री गणेश अष्टकम् गणों के नायक गणेश की स्तुति में आठ श्लोकों का स्तोत्र है, जो परम्परा से व्यास रचित माना जाता है और पुराणों में संकलित है (स्रोत इसे पद्म अथवा नारद पुराण में रखते हैं)। हर श्लोक उसी टेक पर समाप्त होता है — वन्देऽहं गणनायकम् — और उनके एकदन्त, तप्तकांचन से महाकाय, विशाल नेत्र तथा देवासुर संग्राम में मूषक वाहन का वर्णन करता है। अन्त की फलश्रुति भक्तिपूर्वक पाठ करने वाले को सर्व पापों से मुक्ति का वचन देती है।
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