गणेश सहस्रनाम स्तोत्रम् गणेश पुराण के उपासना खण्ड का सहस्रनाम स्तोत्र है, जो संवाद रूप में आता है: मुनि पूछते हैं कि गणेश ने सहस्र नाम कैसे उपदिष्ट किये, ब्रह्मा उत्तर देते हैं, और फिर स्वयं गणपति उन्हें कहते हैं। कथा का आधार शिव का प्रसंग है — त्रिपुर दहन के उद्यम में गणेश का पूजन किये बिना चलने पर वे विघ्नों से घिर गये, तब महागणपति की आराधना की और उन्हें यह स्तोत्र प्राप्त हुआ। पाठ चार भागों में होता है: पूर्व पीठिका जो यह कथा कहती है, न्यास और ध्यान जो पाठक को सिद्ध करते हैं, 170 श्लोकों में विस्तृत सहस्र नाम, और विस्तृत फलश्रुति जो पाठ का फल बताती है।
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