कृष्णाष्टकम् कृष्ण की स्तुति में आठ श्लोकों का स्तोत्र है, जो आदि शंकराचार्य रचित माना जाता है और वसुदेव सुतं देवं से आरम्भ होता है। हर श्लोक कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् पर समाप्त होता है — कंस और चाणूर का मर्दन करने वाले बालक से लेकर मयूरपिच्छ धारी नीलमेघ श्याम, वनमाला विभूषित, शंख-चक्रधारी रूप तक। ध्यान रहे कि श्री गोप गोकुल से आरम्भ होने वाला दूसरा कृष्णाष्टकम् वल्लभाचार्य की रचना है।
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