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श्लोक 2

पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः । अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च ॥

pūtātmā paramātmā ca muktānāṃ paramā gatiḥ | avyayaḥ puruṣaḥ sākṣī kṣetrajño'kṣara eva ca ||

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शब्दार्थ

नामार्थाः

इस श्लोक के प्रत्येक नाम को सीखें — संस्कृत, लिप्यन्तरण और अर्थ।

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क्रमाभ्यास

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क्रमाभ्यासः

स्तोत्र के क्रम में अर्थों को स्मरण करें, एक-एक नाम।

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पाद-अर्थ

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पादार्थाः

8 अक्षर के प्रत्येक पाद और उसमें आए नामों को समझें।

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पूर्ण श्लोक

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श्लोकार्थः

पूरे श्लोक को गद्य अनुवाद और संदर्भ के साथ पढ़ें।