आचार्यात् पादमादत्ते

आचार्यात् पादमादत्ते पादं शिष्यः स्वमेधया । पादं सब्रह्मचारिभ्यः पादं कालक्रमेण च ॥

आचार्यात्गुरु से
पादम्एक चौथाई
आदत्तेप्राप्त करता है
पादम्एक चौथाई
शिष्यःशिष्य
स्वमेधयाअपनी बुद्धि से
पादम्एक चौथाई
सब्रह्मचारिभ्यःसहपाठियों से
पादम्एक चौथाई
कालक्रमेणकालक्रम से
चऔर

एक चौथाई ज्ञान गुरु से मिलता है, एक चौथाई अपनी बुद्धि से। एक चौथाई सहपाठियों से प्राप्त होता है, और शेष चौथाई कालक्रम में अपने आप आता है।

educationlearningwisdom

हर सुबह एक संस्कृत श्लोक, अर्थ सहित — अपने ईमेल पर।

मुफ़्त। हर दिन एक श्लोक। कभी भी अनसब्सक्राइब करें।

हम केवल श्लोक भेजेंगे। कोई स्पैम नहीं, कोई साझा नहीं।