SubhashitamAnushtubh
अहं च त्वं च राजेन्द्र लोकनाथावुभावपि । बहुव्रीहिरहं राजन् षष्ठीतत्पुरुषो भवान् ॥
हे राजेन्द्र! हम दोनों लोकनाथ हैं। मैं बहुव्रीहि (लोक मेरा नाथ है) और आप षष्ठीतत्पुरुष (लोक के नाथ)।
Sanskritgrammarhumor
अहं च त्वं च राजेन्द्र लोकनाथावुभावपि । बहुव्रीहिरहं राजन् षष्ठीतत्पुरुषो भवान् ॥
हे राजेन्द्र! हम दोनों लोकनाथ हैं। मैं बहुव्रीहि (लोक मेरा नाथ है) और आप षष्ठीतत्पुरुष (लोक के नाथ)।
Free. One verse a day. Unsubscribe anytime.
We'll only send you verses. No spam, no sharing.