अहो दुर्जनसंसर्गात्

Subhashitam

अहो दुर्जनसंसर्गात् मानहानिः पदे पदे । पावकः लोहसंगेन मुद्गरैरभिताड्यते ॥

अहोअहो / हाय
दुर्जनसंसर्गात्दुर्जनों की संगति से
मानहानिःमान की हानि
पदे पदेपग-पग पर
पावकःपावक / अग्नि
लोहसंगेनलोहे के संसर्ग से
मुद्गरैःमुद्गरों से
अभिताड्यतेपीटा जाता है

हाय! दुर्जनों की संगति से पग-पग पर मान की हानि होती है। शुद्ध पावक (अग्नि) भी लोहे के संसर्ग से मुद्गर के घावों का शिकार होता है।

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