Subhashitam
अङ्गणवेदी वसुधा कुल्या जलधिः स्थली च पातालम् । वाल्मीकश्च सुमेरुः कृतप्रतिज्ञस्य धीरस्य ॥
दृढ़ प्रतिज्ञावाले धीर पुरुष के लिए पृथ्वी आँगन जैसी, समुद्र नाली जैसा, पाताल समतल भूमि जैसा, और सुमेरु पर्वत वाल्मीक (बाँबी) जैसा प्रतीत होता है।
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