अन्नदानं परं दानं

Subhashitam

अन्नदानं परं दानं विद्यादानमतः परम् । अन्नेन क्षणिका तृप्तिः यावज्जीवं च विद्यया ॥

अन्नदानम्अन्नदान
परम्श्रेष्ठ
दानम्दान
विद्यादानम्विद्यादान
अतःइससे
परम्श्रेष्ठतर
अन्नेनअन्न से
क्षणिकाक्षणिक
तृप्तिःतृप्ति
यावज्जीवम्जीवन भर
चऔर
विद्ययाविद्या से

अन्नदान बड़ा दान है, परन्तु विद्यादान उससे भी बड़ा है। अन्न से क्षणिक तृप्ति होती है, विद्या से जीवन भर तृप्ति रहती है।

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