SubhashitamAryā
अतिपरिचयादवज्ञा सन्ततगमनात् अनादरो भवति । मलये भिल्लपुरन्ध्री चन्दनतरुकाष्ठम् इन्धनं कुरुते ॥
अतिपरिचयात्अति परिचय से
अवज्ञाअवज्ञा
चन्दनतरुकाष्ठम्चन्दन (की लकड़ी)
इन्धनम्ईंधन
अति परिचय से अवज्ञा और बार-बार जाने से अनादर होता है। मलय पर्वत की भील स्त्रियाँ चन्दन को ईंधन बनाती हैं।
familiaritycontemptrespect