SubhashitamAnushtubh
अतितृष्णा न कर्तव्या तृष्णां नैव परित्यजेत् । शनैः शनैश्च भोक्तव्यं स्वयं वित्तमुपार्जितम् ॥
अतितृष्णाअति तृष्णा
तृष्णाम्तृष्णा
ननहीं
परित्यजेत्त्याग करना चाहिए
शनैः शनैःधीरे-धीरे
भोक्तव्यम्भोगना चाहिए
उपार्जितम्अर्जित
अति तृष्णा नहीं करनी चाहिए, परन्तु तृष्णा का पूर्ण त्याग भी नहीं। स्वयं अर्जित धन को धीरे-धीरे, मध्यम मार्ग से भोगना चाहिए।
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