दर्शने स्पर्शने वापि

Subhashitam

दर्शने स्पर्शने वापि श्रवणे भाषणेऽपि वा । यत्र द्रवत्यन्तरङ्गं स स्नेह इति कथ्यते ॥

दर्शनेदर्शन पर
स्पर्शनेस्पर्श पर
श्रवणेश्रवण पर
भाषणेभाषण पर
द्रवतिद्रवित हो जाए
अन्तरङ्गम्अन्तरंग
स्नेहःस्नेह

जिसके दर्शन, स्पर्श, श्रवण या भाषण पर अन्तरंग द्रवित हो जाए, वही स्नेह कहलाता है।

loveaffectiondefinitionsneha

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