एकं विषरसं हन्ति

Subhashitam

एकं विषरसं हन्ति शस्त्रेणैकश्च वध्यते । सराष्ट्रं सप्रजं हन्ति राजानं मन्त्रविप्लवः ॥

विषरसम्विष
शस्त्रेणशस्त्र से
चऔर
मन्त्रविप्लवःगलत सलाह
राजानम्राजा को

विष एक को मारता है, शस्त्र एक को मारता है। परन्तु गलत सलाह राजा को राष्ट्र और प्रजा सहित नष्ट कर देती है।

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