SubhashitamAnushtubh
कर्मणा रहितं ज्ञानं पङ्गुना सदृशं भवेत् । न तेन प्राप्यते किञ्चित् न च किञ्चित् प्रसाध्यते ॥
कर्म से रहित ज्ञान लँगड़े के समान है — उससे न कुछ प्राप्त होता है, न कुछ सिद्ध होता है।
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कर्मणा रहितं ज्ञानं पङ्गुना सदृशं भवेत् । न तेन प्राप्यते किञ्चित् न च किञ्चित् प्रसाध्यते ॥
कर्म से रहित ज्ञान लँगड़े के समान है — उससे न कुछ प्राप्त होता है, न कुछ सिद्ध होता है।
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