क्षुद्रं न किञ्चिदिह नानुपयोगि किञ्चित् सर्वं हि सङ्घटितमत्र भवेत्फलाय । इत्थं जनं विनयति स्म निरन्तरं यः तं केशवं मुहुरहम् मनसा स्मरामि ॥
इस संसार में कुछ भी तुच्छ नहीं, कुछ भी निरर्थक नहीं — सब कुछ सही प्रकार संगठित हो तो फलदायी होता है। ऐसी शिक्षा देने वाले केशव का मैं सदा स्मरण करता हूँ।
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