क्षुद्रं न किञ्चिदिह नानुपयोगि किञ्चित्

Keshavashtakam4

क्षुद्रं न किञ्चिदिह नानुपयोगि किञ्चित् सर्वं हि सङ्घटितमत्र भवेत्फलाय । इत्थं जनं विनयति स्म निरन्तरं यः तं केशवं मुहुरहम् मनसा स्मरामि ॥

क्षुद्रम्तुच्छ
अनुपयोगिनिरर्थक
सङ्घटितम्संगठित
केशवम्केशव

इस संसार में कुछ भी तुच्छ नहीं, कुछ भी निरर्थक नहीं। सब कुछ सही प्रकार संगठित हो तो फलदायी होता है। ऐसी शिक्षा देने वाले केशव का मैं सदा स्मरण करता हूँ।

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