Raghuvamsha / KalidasaAnushtubh
लौकिकानां हि साधूनां अर्थं वाग्अनुवर्तते । ऋषीणां पुनरादीनां वाग्अर्थोऽनुधावति ॥
सामान्य सज्जनों में वाणी अर्थ के अनुसार चलती है; किन्तु आदि ऋषियों की वाणी के पीछे अर्थ स्वयं दौड़ता है।
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