मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते

Subhashitam

मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसञ्चितम् । दम्पत्योः कलहो नास्ति तत्र श्रीः स्वयमागता ॥

मूर्खाःमूर्ख
पूज्यन्तेपूजित होते हैं
धान्यम्अन्न
सुसञ्चितम्संचित
दम्पत्योःपति-पत्नी के बीच
कलहःकलह
श्रीःलक्ष्मी / श्री
स्वयमागतास्वयं आ जाती है

जहाँ मूर्ख पूजित नहीं होते, जहाँ अन्न संचित रहता है, जहाँ पति-पत्नी में कलह नहीं, वहाँ लक्ष्मी स्वयं ही आ जाती हैं।

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