न देवा दण्डमादाय

Subhashitam

न देवा दण्डमादाय रक्षन्ति पशुपालवत् । यं तु रक्षितुमिच्छन्ति बुद्ध्या संविभजन्ति तम् ॥

दण्डम्दण्ड
बुद्ध्याबुद्धि से

देव दण्ड लेकर पशुपालक की तरह रक्षा नहीं करते। जिसकी रक्षा चाहते हैं उसे बुद्धि प्रदान करते हैं।

Godintelligenceprotection

हर सुबह एक संस्कृत श्लोक, अर्थ सहित — अपने ईमेल पर।

मुफ़्त। हर दिन एक श्लोक। कभी भी अनसब्सक्राइब करें।

हम केवल श्लोक भेजेंगे। कोई स्पैम नहीं, कोई साझा नहीं।