SubhashitamAnushtubh
न राज्यं न राजासीत् न दण्ड्यो न च दाण्डिकः । धर्मेणैव प्रजास्सर्वा रक्षन्ति स्म परस्परम् ॥
ननहीं
राज्यम्राज्य
ननहीं
राजाराजा
आसीत्था
ननहीं
दण्ड्यःदण्ड्य
ननहीं
चऔर
दाण्डिकःदण्ड देने वाला
धर्मेणधर्म से
एवही
प्रजाःप्रजा
सर्वाःसभी
रक्षन्तिरक्षा करती हैं
स्म(भूतकाल सूचक)
परस्परम्परस्पर
न राज्य था न राजा, न दण्ड्य न दण्ड देने वाला। धर्म से ही सभी प्रजा परस्पर रक्षा करती थीं।
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