SubhashitamAnushtubh
नाम्भोधिरर्थितामेति सदाम्भोभिश्च पूर्यते । आत्मा तु पात्रतां नेयः पात्रमायान्ति सम्पदः ॥
समुद्र कभी माँगता नहीं, फिर भी सदा जल से भरा रहता है। अपने आप को योग्य बनाओ — सम्पत्ति स्वयं योग्य व्यक्ति के पास आ जाती है।
self-worthdignity