प्रथमवयसि पीतं तोयमल्पं स्मरन्तः

Subhashitam

प्रथमवयसि पीतं तोयमल्पं स्मरन्तः शिरसि निहितभाराः नारिकेला नराणाम् । ददति जलमनल्पं स्वादमाजीवितान्तं न हि कृतमुपकारं साधवो विस्मरन्ति ॥

प्रथमवयसिआरम्भिक आयु में
पीतम्पी हुई
तोयम्जल
नारिकेलाःनारियल के वृक्ष
आजीवितान्तम्जीवन-पर्यन्त
उपकारम्उपकार
साधवःसत्पुरुष
ननहीं
विस्मरन्तिभूलते हैं

आरम्भिक आयु में पी हुई थोड़ी जलराशि को स्मरण करते हुए, नारियल के वृक्ष अपने शिरोभार को उठाए हुए मनुष्यों को जीवन-पर्यन्त प्रचुर स्वादिष्ट जल प्रदान करते हैं। सत्पुरुष भी किये हुए उपकार को कभी नहीं भूलते।

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