प्रथमे नार्जिता विद्या

Subhashitam

प्रथमे नार्जिता विद्या द्वितीये नार्जितं धनम् । तृतीये नार्जितं पुण्यं चतुर्थे किं करिष्यति ॥

प्रथमेपहले आश्रम में
ननहीं
अर्जिताअर्जित की
विद्याविद्या
द्वितीयेदूसरे में
धनम्धन
तृतीयेतीसरे में
पुण्यम्पुण्य
चतुर्थेचौथे में

यदि पहले आश्रम में विद्या अर्जित नहीं की, दूसरे में धन, तीसरे में पुण्य, तो चौथे आश्रम में व्यक्ति क्या करेगा?

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