SubhashitamAnushtubh
साक्षराः विपरीताश्चेत् राक्षसा एव केवलम् । सरसो विपरीतश्चेत् सरसत्वं न मुञ्चति ॥
'साक्षर' को उलटा पढ़ो तो केवल 'राक्षस' ही बनता है। परन्तु 'सरस' को उलटा पढ़ो तो भी उसकी सरसता नहीं जाती — सच्चा सरस व्यक्ति किसी भी स्थिति में अपना गुण नहीं छोड़ता।
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