संघो ददाति सामर्थ्यं

Subhashitam

संघो ददाति सामर्थ्यं सामर्थ्यात् सर्वयोग्यता । योग्यत्वाद् यः समुत्कर्षो निरपायः स सर्वथा ॥

संघःसंगठन
सामर्थ्यम्सामर्थ्य
समुत्कर्षःउन्नति
निरपायःनिरापद

संगठन सामर्थ्य देता है, सामर्थ्य से सर्वयोग्यता आती है, और योग्यता से जो उन्नति होती है वह सर्वथा निरापद होती है।

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