सङ्ग्रहैकपरः प्रायः

Subhashitam

सङ्ग्रहैकपरः प्रायः समुद्रोऽपि रसातले । दातारं जलदं पश्य गर्जन्तं भुवनोपरि ॥

सङ्ग्रहैकपरःसंग्रह में लगा हुआ
समुद्रःसमुद्र
रसातलेरसातल / नीचे
दातारम्दानी
जलदम्मेघ
गर्जन्तम्गर्जन करते हुए
भुवनोपरिजगत के ऊपर

केवल संग्रह में लगा हुआ समुद्र भी रसातल (नीचे) में ही पड़ा रहता है। किन्तु दानी मेघ को देखो, जो जगत के ऊपर गर्जन करता है।

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