सत्यं वद । धर्मं चर

Taittirīya Upaniṣad1.11 Śikṣāvallī

सत्यं वद । धर्मं चर । स्वाध्यायान्मा प्रमदः । आचार्याय प्रियं धनमाहृत्य प्रजातन्तुं मा व्यवच्छेत्सीः ॥

सत्यं वदसत्य बोलो
धर्मं चरधर्म का आचरण करो
स्वाध्यायात्स्वाध्याय से
मा प्रमदःप्रमाद मत करो
आचार्यायआचार्य को
प्रजातन्तुम्संतान-परम्परा
मा व्यवच्छेत्सीःमत तोड़ो

सत्य बोलो; धर्म का आचरण करो; स्वाध्याय में कभी प्रमाद मत करो। आचार्य को उचित दक्षिणा देकर, संतान-परम्परा मत तोड़ो।

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