SubhashitamAnushtubh
शनैः पन्थाः शनैः कन्था शनैः पर्वतमस्तके । शनैः विद्या शनैः वित्तं पञ्चैतानि शनैः शनैः ॥
धीरे-धीरे मार्ग तय होता है, धीरे-धीरे वस्त्र बुना जाता है, धीरे-धीरे पर्वत शिखर पर पहुँचते हैं। विद्या और धन भी — ये पाँचों धीरे-धीरे ही आते हैं।
patienceperseverance