SubhashitamAnushtubh
स्वकार्ये शिथिलो यः स्यात् किमन्येन भवेदिह । जागरूकः स्वकार्ये यः तत्सहायाश्च तत्समाः ॥
जो स्वयं अपने कार्य में शिथिल रहे, उसकी दूसरा क्या सहायता करे? जो अपने कार्य में सजग रहता है, उसके सहायक भी उसी के समान होते हैं।
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