SubhashitamAnushtubh
तैलाद् रक्षेत् जलाद् रक्षेत् रक्षेत् शिथिल बन्धनात् । मूर्खहस्ते न दत्तव्यं एवं वदति पुस्तकम् ॥
तेल से बचाओ, जल से बचाओ, शिथिल बन्धन से बचाओ और मूर्ख के हाथ में मत दो — ऐसा पुस्तक कहता है।
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तैलाद् रक्षेत् जलाद् रक्षेत् रक्षेत् शिथिल बन्धनात् । मूर्खहस्ते न दत्तव्यं एवं वदति पुस्तकम् ॥
तेल से बचाओ, जल से बचाओ, शिथिल बन्धन से बचाओ और मूर्ख के हाथ में मत दो — ऐसा पुस्तक कहता है।
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