SubhashitamUpajati
तृणानि नोन्मूलयति प्रभञ्जनो मृदूनि नीचैः प्रणतानि सर्वतः । स्वभाव एवोन्नतचेतसामयं महान्महत्स्वेव करोति विक्रमम् ॥
प्रचण्ड वायु कोमल तृणों को नहीं उखाड़ती, जो चारों ओर झुके हुए हैं। यह उच्चचित्त महापुरुषों का स्वभाव ही है — वे अपना पराक्रम केवल महान् लोगों पर ही दिखाते हैं।
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