वदनं प्रसादसदनं सदयं

Subhashitam

वदनं प्रसादसदनं सदयं हृदयं सुधामुचो वाचः । करणं परोपकरणं येषां केषां न ते वन्द्याः ॥

वदनम्मुख
प्रसादसदनम्प्रसन्नता का घर
सदयम्दयामय
हृदयम्हृदय
सुधामुचःअमृत-वर्षिणी
परोपकरणम्परोपकार में लगा
वन्द्याःवन्दनीय

जिनका मुख प्रसन्नता का घर है, हृदय दयामय है, वाणी अमृत-वर्षिणी है, और कर्म परोपकार के लिए हैं, ऐसे लोगों को कौन नमन नहीं करेगा?

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