विदेशेषु धनं विद्या

Subhashitam

विदेशेषु धनं विद्या व्यसनेषु धनं मतिः । परलोके धनं धर्मः शीलं सर्वत्र वै धनम् ॥

विदेशेषुविदेश में
मतिःमति
शीलम्शील

विदेश में विद्या धन है, व्यसन (कठिनाई) में मति धन है। परलोक में धर्म धन है और शील सर्वत्र धन है।

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