व्यसने मित्रपरीक्षा

Subhashitam

व्यसने मित्रपरीक्षा शूरपरीक्षा रणाङ्गणे भवति । विनये भृत्यपरीक्षा दानपरीक्षा च दुर्भिक्षे ॥

व्यसनेविपत्ति में
मित्रपरीक्षामित्र की परीक्षा
शूरपरीक्षाशूर की परीक्षा
रणाङ्गणेरणभूमि में
विनयेविनय में
भृत्यपरीक्षासेवक की परीक्षा
दुर्भिक्षेदुर्भिक्ष / अकाल में

विपत्ति में मित्र की परीक्षा होती है, रणभूमि में शूर की, विनय में सेवक की, और दुर्भिक्ष (अकाल) में दानशीलता की।

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