SubhashitamAnushtubh
यस्य चित्तं निर्विषयं हृदयं यस्य शीतलम् । तस्य मित्रं जगत्सर्वं तस्य मुक्तिः करस्थिता ॥
जिसका मन विषयों से मुक्त है और हृदय शान्त है — पूरा संसार उसका मित्र है और मुक्ति उसके हाथ में है।
peaceliberation
यस्य चित्तं निर्विषयं हृदयं यस्य शीतलम् । तस्य मित्रं जगत्सर्वं तस्य मुक्तिः करस्थिता ॥
जिसका मन विषयों से मुक्त है और हृदय शान्त है — पूरा संसार उसका मित्र है और मुक्ति उसके हाथ में है।
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