SubhashitamAnushtubh
यथा हि मलिनैः वस्त्रैः यत्र कुत्र उपविष्यते । वृत्तः चलितेनापि एवं शेषं वृत्तं न रक्षति ॥
मलिनैःमलिन
वस्त्रैःवस्त्रों से
वृत्तम्चरित्र
जैसे मलिन वस्त्र वाला कहीं भी बैठ जाता है, वैसे ही जिसका चरित्र गिर गया वह किसी भी बुरे कर्म से नहीं हिचकता।
characterconductmorality