अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम् । विविधाश्च पृथक्चेष्टा दैवं चैवात्र पञ्चमम् ॥
कर्म का आधार, कर्ता, विभिन्न साधन, अनेक प्रकार की चेष्टाएँ, और पाँचवाँ दैव — ये कर्म के पाँच कारण हैं।
actionphilosophy
अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम् । विविधाश्च पृथक्चेष्टा दैवं चैवात्र पञ्चमम् ॥
कर्म का आधार, कर्ता, विभिन्न साधन, अनेक प्रकार की चेष्टाएँ, और पाँचवाँ दैव — ये कर्म के पाँच कारण हैं।
मुफ़्त। हर दिन एक श्लोक। कभी भी अनसब्सक्राइब करें।
हम केवल श्लोक भेजेंगे। कोई स्पैम नहीं, कोई साझा नहीं।