Mahasubhashita SangrahaAnushtubh
अकिञ्चनत्वं राज्यं च तुलया समतोलयत् । अकिञ्चनत्वमधिकं राज्यादपि जितात्मनः ॥
निर्धनता और राज्य को जब तराजू पर तौला गया, तो जिसने अपने मन को जीत लिया है उसके लिए निर्धनता राज्य से भी बड़ी निकली।
detachmentself-mastery
अकिञ्चनत्वं राज्यं च तुलया समतोलयत् । अकिञ्चनत्वमधिकं राज्यादपि जितात्मनः ॥
निर्धनता और राज्य को जब तराजू पर तौला गया, तो जिसने अपने मन को जीत लिया है उसके लिए निर्धनता राज्य से भी बड़ी निकली।
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