अमंत्रमक्षरं नास्ति

अमंत्रमक्षरं नास्ति नास्ति मूलमनौषधम् । अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः ॥

अमंत्रम्जो मंत्र न हो
अक्षरम्अक्षर
नास्तिनहीं है
मूलम्जड़ी-बूटी / मूल
अनौषधम्जो औषधि न हो
अयोग्यःअयोग्य
पुरुषःमनुष्य
योजकःजोड़ने वाला / क्षमता पहचाननेवाला
दुर्लभःदुर्लभ

कोई अक्षर ऐसा नहीं जो मंत्र न हो, कोई जड़ी-बूटी ऐसी नहीं जो औषधि न हो। कोई मनुष्य अयोग्य नहीं। दुर्लभ है तो केवल उसे जोड़ने वाला, उसकी क्षमता पहचाननेवाला।

potentialwisdomleadership

हर सुबह एक संस्कृत श्लोक, अर्थ सहित — अपने ईमेल पर।

मुफ़्त। हर दिन एक श्लोक। कभी भी अनसब्सक्राइब करें।

हम केवल श्लोक भेजेंगे। कोई स्पैम नहीं, कोई साझा नहीं।