आरोप्यते शिला शैले

Hitopadesha

आरोप्यते शिला शैले यथा यत्नेन भूयसा । निपात्यते सुखेनाधस्तथात्मा गुणदोषयोः ॥

शिलाशिला
शैलेपर्वत पर
यत्नेनपरिश्रम से
गुणदोषयोःगुणों और दोषों का

जैसे बहुत परिश्रम से शिला को पर्वत पर चढ़ाया जाता है, पर वह सहज ही नीचे लुढ़क जाती है, वैसे ही मनुष्य गुणों से ऊपर उठता है, परन्तु एक दोष से तुरन्त गिर जाता है।

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