धारणात् धर्म इत्याहुः धर्मो धारयति प्रजाः । यत्स्याद्धारणसंयुक्तं स धर्म इति निश्चयः ॥
जो एकता में बाँधता है उसे धर्म कहते हैं। धर्म प्रजा को धारण करता है। जिसमें सबको जोड़ने की शक्ति हो — वही निश्चित रूप से धर्म है।
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धारणात् धर्म इत्याहुः धर्मो धारयति प्रजाः । यत्स्याद्धारणसंयुक्तं स धर्म इति निश्चयः ॥
जो एकता में बाँधता है उसे धर्म कहते हैं। धर्म प्रजा को धारण करता है। जिसमें सबको जोड़ने की शक्ति हो — वही निश्चित रूप से धर्म है।
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