एतद्देशप्रसूतस्य

Manusmṛti

एतद्देशप्रसूतस्य सकाशात् अग्रजन्मनः । स्वं स्वं चरित्रं शिक्षेरन् पृथिव्यां सर्वमानवाः ॥

एतद्देशइस देश
चरित्रम्चरित्र
शिक्षेरन्सीखें
सर्वमानवाःसभी मानव

इस देश में उत्पन्न अग्रजन्मा ऋषियों से पृथ्वी के सभी मानव अपना-अपना चरित्र सीखें।

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